किसानों के लिए एक क्रांतिकारी कदम उठाया गया है। अब 5 लाख रुपये तक कीमत वाले सोलर पंप सिर्फ 50 हजार रुपये में घर ला सकते हैं। सरकार योजना के तहत बाकी राशि का बोझ खुद उठाएगी, जिससे छोटे किसानों की जेब पर कोई दबाव न पड़े। यह सुविधा राज्य स्तर पर मुख्यमंत्री की पहल से शुरू हुई है।

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योजना का उद्देश्य
इस पहल का मुख्य लक्ष्य किसानों को सस्ती और स्वच्छ ऊर्जा उपलब्ध कराना है। पारंपरिक डीजल या बिजली पंपों से होने वाले भारी खर्च से मुक्ति मिलेगी। सूरज की रोशनी से चलने वाले ये पंप साल भर निर्बाध सिंचाई सुनिश्चित करेंगे। किसान अतिरिक्त बिजली बनाकर बेच भी सकेंगे, जिससे उनकी आय में इजाफा होगा। रखरखाव की चिंता भी न रहेगी, क्योंकि पांच साल तक कंपनी ही जिम्मेदार होगी।
पात्र किसानों की योग्यता
हर छोटा-बड़ा किसान लाभ ले सकता है, बशर्ते उसके पास अपनी जमीन पर सिंचाई का स्रोत जैसे कुआं या बोरवेल हो। नाम पर कृषि भूमि दर्ज होनी चाहिए। पहले से स्थायी बिजली कनेक्शन न होने वाले या उसे कटवाने को तैयार किसानों को प्राथमिकता मिलेगी। सभी वर्गों – सामान्य, ओबीसी, एससी, एसटी – के लिए एक समान नियम हैं। कोई आय सीमा नहीं, बस खेती का जुनून हो।
सब्सिडी का लाभ
सब्सिडी 90 फीसदी तक है। 1 एचपी से 7.5 एचपी तक के पंप उपलब्ध हैं। उदाहरणस्वरूप, छोटे पंप पर किसान का हिस्सा महज 19-25 हजार रुपये रहता है, जबकि बड़े पर 1.35 लाख तक। केंद्र सरकार 30 फीसदी, राज्य बाकी देगी। ऋण की सुविधा भी है, जिसका ब्याज सरकार वहन करेगी। इससे किसान बिना कर्ज के बोझ के पंप लगा सकेंगे।
आवेदन की आसान प्रक्रिया
ऑनलाइन पोर्टल पर जाकर फॉर्म भरें। आधार, बैंक खाता, जमीन के कागजात और फोटो अपलोड करें। विभाग साइट चेक करेगा, स्वीकृति मिलते ही पंप लगेगा। डीबीटी से सब्सिडी सीधे खाते में आएगी। प्रक्रिया तेज है, अभी शुरू हुई है तो देर न करें। स्थानीय कृषि या ऊर्जा कार्यालय से मदद लें।
सोलर पंप के फायदे
ये पंप पर्यावरण के दोस्त हैं, कोई धुआं या शोर नहीं। 25 साल की गारंटी के साथ आते हैं। फसलें हरी-भरी रहेंगी, उत्पादन बढ़ेगा। बिजली बिल शून्य, डीजल का खर्च खत्म। ग्रामीण इलाकों में बिजली की कमी दूर होगी। ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम है।
किसानों की सफल कहानियां
कई किसानों ने अपनाया तो फसल चक्र साल भर चलने लगा। एक किसान ने बताया, पहले डीजल पर हजारों उड़ जाते थे, अब बचत से नई फसल बो रहे हैं। अतिरिक्त बिजली बिक्री से मासिक आय शुरू हो गई। यह योजना खेती को नया आयाम दे रही है।
आगे की राह
सरकार 50 हजार से ज्यादा पंप लगाने का लक्ष्य रखेगी। जल्द ही और किसानों तक पहुंचेगी। तकनीक अपनाएं, समृद्धि पाएं। यह सिर्फ पंप नहीं, किसान का भविष्य बदलने वाला हथियार है।
















