
उत्तर प्रदेश में बेटियों के संपत्ति अधिकारों को लेकर एक ऐतिहासिक बदलाव की तैयारी चल रही है। योगी आदित्यनाथ सरकार राज्य के राजस्व कानून में संशोधन कर शादीशुदा बेटियों को भी पैतृक संपत्ति और कृषि भूमि में बराबरी का अधिकार देने की दिशा में कदम बढ़ा रही है। यह बदलाव लागू होने के बाद बेटियों और बेटों के बीच संपत्ति को लेकर चला आ रहा दशकों पुराना भेदभाव समाप्त हो सकता है।
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अब तक क्या था नियम?
वर्तमान में उत्तर प्रदेश की राजस्व संहिता के तहत पिता की कृषि भूमि में अधिकार केवल पुत्रों, अविवाहित बेटियों और विधवाओं को ही मिलता था। शादीशुदा बेटियों को यह कहकर बाहर रखा जाता था कि वे विवाह के बाद दूसरे परिवार का हिस्सा बन जाती हैं। इसी कारण जमीन के रिकॉर्ड और नामांतरण में बेटियों का नाम अक्सर दर्ज नहीं हो पाता था।
सरकार क्यों कर रही है बदलाव?
सरकार का मानना है कि यह प्रावधान संविधान में दिए गए समानता के अधिकार और महिला सशक्तिकरण की भावना के खिलाफ है। यही वजह है कि राजस्व परिषद ने कानून में संशोधन का प्रस्ताव तैयार किया है, जिसे जल्द ही कैबिनेट और विधानसभा के सामने रखा जा सकता है।
सूत्रों के अनुसार, संशोधन लागू होते ही शादीशुदा बेटियों को भी पिता की पैतृक कृषि भूमि में वही अधिकार मिलेंगे, जो बेटों को मिलते हैं।
केंद्र का कानून पहले से देता है अधिकार
गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने साल 2005 में हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम में संशोधन कर बेटियों को पैतृक संपत्ति में सहदायिक (coparcenary) अधिकार दे दिए थे। इसके तहत बेटी, चाहे शादीशुदा हो या अविवाहित, पिता की संपत्ति में बराबर की हिस्सेदार मानी जाती है।
हालांकि, जमीन और कृषि भूमि से जुड़े मामलों में कई राज्यों के स्थानीय राजस्व कानून आड़े आ जाते थे। उत्तर प्रदेश में भी यही स्थिति थी, जिसे अब बदला जा रहा है।
अदालतें भी दे चुकी हैं बराबरी का संदेश
सुप्रीम कोर्ट अपने कई अहम फैसलों में यह स्पष्ट कर चुका है कि बेटियों को संपत्ति में जन्म से ही बराबर का अधिकार है। कोर्ट ने यह भी कहा है कि शादी होने से बेटी का पैतृक संपत्ति पर अधिकार खत्म नहीं हो सकता।
क्या होंगे इस फैसले के असर?
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस बदलाव से:
- महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी
- पारिवारिक संपत्ति विवादों में कमी आएगी
- जमीन के रिकॉर्ड में महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी
- समाज में लैंगिक समानता को मजबूती मिलेगी
हालांकि, साथ ही यह भी माना जा रहा है कि शुरुआत में नामांतरण और बंटवारे को लेकर कुछ विवाद सामने आ सकते हैं, लेकिन लंबे समय में यह फैसला सामाजिक रूप से अहम साबित होगा।
कब तक लागू हो सकता है कानून?
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, अगर प्रस्ताव को जल्द मंजूरी मिल जाती है तो इसी साल कानून में संशोधन लागू किया जा सकता है। इसके बाद उत्तर प्रदेश उन राज्यों की सूची में शामिल हो जाएगा, जहां जमीन के मामलों में भी बेटियों को बेटों के बराबर अधिकार प्राप्त हैं।
कुल मिलाकर
उत्तर प्रदेश सरकार का यह कदम सिर्फ एक कानूनी बदलाव नहीं, बल्कि सामाजिक सोच में परिवर्तन की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। अगर यह कानून लागू होता है, तो यह राज्य की लाखों बेटियों के लिए आर्थिक सुरक्षा और सम्मान का नया रास्ता खोल सकता है।
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5 thoughts on “Property Rights: यूपी में बेटियों के लिए बड़ी खबर! पैतृक संपत्ति में मिलेगा बेटों के बराबर हक; सरकार जल्द बदलेगी सालों पुराना कानून।”