
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने शैक्षणिक सत्र 2025-26 की बोर्ड परीक्षाओं को लेकर सख्त रुख अख्तियार कर लिया है बोर्ड ने आगामी 10वीं और 12वीं की परीक्षाओं के लिए नियमों में दो बड़े बदलाव किए हैं, जिनका पालन न करने पर छात्र परीक्षा देने से वंचित रह सकते हैं, नए दिशानिर्देशों के तहत अब 75% उपस्थिति (Attendance) और ‘अपार आईडी’ (APAAR ID) को अनिवार्य कर दिया गया है।
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डमी स्कूलों पर नकेल: 75% अटेंडेंस का सख्त नियम
CBSE ने स्पष्ट कर दिया है कि नियमित छात्रों के लिए स्कूल में कम से कम 75% उपस्थिति होना अनिवार्य है, बोर्ड का यह कदम विशेष रूप से उन छात्रों और स्कूलों के लिए है जो ‘डमी’ एडमिशन के जरिए केवल परीक्षाओं में शामिल होते हैं।
- 1 जनवरी तक गणना: उपस्थिति की गणना सत्र की शुरुआत से 1 जनवरी तक की जाएगी।
- परीक्षा से रोक: यदि किसी छात्र की उपस्थिति निर्धारित मानक से कम पाई जाती है, तो उसे परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
- विशेष छूट: केवल गंभीर बीमारी या असाधारण परिस्थितियों में ही उचित दस्तावेजों के आधार पर संक्षिप्त राहत दी जा सकती है।
‘अपार आईडी’ (APAAR ID) के बिना नहीं भरा जाएगा फॉर्म
डिजिटल इंडिया अभियान को शिक्षा से जोड़ते हुए सीबीएसई ने ‘One Nation, One Student ID’ यानी APAAR आईडी को अनिवार्य बनाया है। यह 12 अंकों की एक विशिष्ट पहचान संख्या है जो छात्र के पूरे शैक्षणिक सफर का डिजिटल रिकॉर्ड रखेगी।
- डिजिलॉकर से जुड़ाव: यह आईडी DigiLocker के माध्यम से संचालित होगी, जहाँ छात्र अपनी मार्कशीट और प्रमाणपत्र सुरक्षित रख सकेंगे।
- पंजीकरण अनिवार्य: बोर्ड परीक्षा के लिए ‘List of Candidates’ (LoC) जमा करते समय स्कूलों को प्रत्येक छात्र की अपार आईडी दर्ज करनी होगी। इसके बिना पंजीकरण प्रक्रिया अधूरी मानी जाएगी।
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इन छात्रों के लिए बढ़ा खतरा
बोर्ड के इस कड़े फैसले से उन छात्रों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं जो स्कूल न जाकर कोचिंग संस्थानों पर निर्भर रहते हैं, सीबीएसई ने स्कूलों को निर्देश दिया है कि वे छात्रों और अभिभावकों को समय रहते इन बदलावों के प्रति सचेत करें ताकि ऐन वक्त पर किसी छात्र का साल खराब न हो।
















