भारत में सोलर ऊर्जा का दौर तेजी से बढ़ रहा है। केंद्र सरकार की योजनाओं से लाखों परिवार मुफ्त बिजली की उम्मीद में सोलर पैनल लगा रहे हैं। लेकिन बाजार में सस्ते दामों पर बिकने वाले नकली पैनल उपभोक्ताओं को फंसाने का काम कर रहे हैं। ये पैनल शुरू में ठीक लगते हैं, पर जल्दी खराब हो जाते हैं।
उत्पादन कम होने से बिजली बिल बढ़ता है और कभी-कभी आग लगने का जोखिम भी पैदा होता है। एक सामान्य घर के लिए 5 किलोवाट का सिस्टम लगाने में 2-3 लाख रुपये लगते हैं। नकली पैनल लेने से ये निवेश डूब जाता है। अच्छी बात यह है कि घर पर ही कुछ सरल जांच से असली और नकली का अंतर पकड़ा जा सकता है। आइए जानते हैं इन पांच आसान तरीकों को।

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विजुअल जांच से शुरू करें
सबसे पहले पैनल को नजदीक से देखें। सामने के कांच पर चिपका स्टिकर नाखून से हल्का सा रगड़ें। अगर यह आसानी से छिलने लगे या उसके नीचे चिपचिपाहट के निशान दिखें, तो सावधान हो जाएं। असली पैनल का स्टिकर मजबूती से चिपका रहता है। फ्रेम को हाथ से छुएं। यह मोटा, चिकना और मजबूत होना चाहिए। कांच साफ और बेदाग हो। पीछे की सफेद शीट पर कोई दरार या गंदगी न हो। ब्रांड का नाम और प्रमाणन चिन्ह साफ दिखने चाहिए। नकली पैनलों में ये निशान धुंधले या गायब होते हैं।
सीरियल नंबर की ऑनलाइन जांच जरूरी
पैनल के पिछले हिस्से पर बना लंबा नंबर नोट करें। इसे बनाने वाली कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट पर डालकर जांचें। अगर नंबर वैध पाया जाए और ग्रेड A बताया जाए, तो पैनल भरोसेमंद है। अन्यथा नकली होने की आशंका है। कांच के अंदर और बाहर का नंबर एक जैसा होना चाहिए। कई बार विक्रेता इस जांच से बचने की कोशिश करते हैं। यह कदम उठाने से 90 प्रतिशत नकली पैनल पकड़े जा सकते हैं।
मल्टीमीटर से उत्पादन टेस्ट करें
यह सबसे महत्वपूर्ण जांच है। दोपहर की तेज धूप में पैनल को खोलें। एक सस्ता मल्टीमीटर लें और इसे वोल्टेज मापने के मोड पर लगाएं। तारों के सिरों पर प्रोब लगाएं। लेबल पर लिखे वोल्टेज के करीब रीडिंग आनी चाहिए। उदाहरण के लिए, 500 वाट का पैनल 40 से 50 वोल्ट दिखाए। फिर करंट मापने के मोड पर छोटा सर्किट बनाकर देखें। रेटेड करंट से कम आए तो पैनल कमजोर है। यह टेस्ट हर पैनल के लिए दोहराएं। नकली वाले 20-30 प्रतिशत कम बिजली बनाते हैं।
वजन और भौतिक गुणवत्ता परखें
असली पैनल का वजन भारी होता है, कम से कम 20 किलो तक। इसे उठाकर तौलें या डेटाशीट से मिलाएं। कनेक्शन बॉक्स पानीरोधी और मजबूत हो। तार साफ और अच्छे कनेक्टर वाले हों। नकली में ये हिस्से सस्ते और ढीले लगते हैं। आयाम भी मानक होने चाहिए। हल्का पैनल जल्दी टूटने वाला होता है।
दस्तावेजों की गहन जांच
विक्रेता से वारंटी कार्ड, टेस्ट रिपोर्ट और उत्पादन चार्ट मांगें। 25 साल की गारंटी वाला पैनल ही लें। सरकारी योजना के तहत केवल अनुमोदित पैनल पर सब्सिडी मिलती है। दस्तावेज अधूरे हों तो मोलभाव न करें।
इन जांचों से उपभोक्ता सुरक्षित रहेंगे। पंजाब जैसे क्षेत्रों में किसान भाई सतर्क रहें। विश्वसनीय डीलर चुनें, लेकिन खुद सजग रहें। सोलर ऊर्जा का लाभ उठाएं, धोखे का शिकार न बनें। सही पैनल से 25 साल तक मुफ्त बिजली मिलेगी।
















