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इजरायल-फिलिस्तीन विवाद: पहली बार यहूदियों को बसने की इजाजत किसने दी? जानें एक देश के बनने की पूरी ऐतिहासिक कहानी

इजरायल-फिलिस्तीन विवाद की जड़ें प्राचीन हैं। 538 ईसा पूर्व फारसी राजा साइरस ने पहली बार यहूदियों को फिलिस्तीन में बसने की इजाजत दी। 1948 में इजरायल बना, युद्धों ने तनाव बढ़ाया। आज भी गाजा-यरूशलेम पर विवाद जारी है।

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इजरायल और फिलिस्तीन के बीच का संघर्ष दुनिया के सबसे पुराने और उलझे हुए विवादों में शुमार है। इसकी शुरुआत हजारों साल पहले हुई, जब पहली बार यहूदियों को पवित्र भूमि में बसने का अधिकार फारसी शासक साइरस महान ने 538 ईसा पूर्व दिया। यह कदम आधुनिक इजरायल के उदय की आधारशिला बना। प्राचीन काल से चली आ रही यह कहानी लाखों लोगों की किस्मत बदल चुकी है।

इजरायल-फिलिस्तीन विवाद: पहली बार यहूदियों को बसने की इजाजत किसने दी? जानें एक देश के बनने की पूरी ऐतिहासिक कहानी

प्राचीन जड़ें और धार्मिक बंधन

यहूदियों का इस क्षेत्र से गहरा नाता करीब 2000 ईसा पूर्व पैगंबर अब्राहम के कनान आगमन से जुड़ा। राजा दाऊद ने लगभग 1000 ईसा पूर्व इजरायल राज्य की स्थापना की और उनके बेटे सुलैमान ने यरूशलेम में पहला मंदिर बनवाया, जो यहूदियों का सर्वोच्च तीर्थस्थल था। 586 ईसा पूर्व बेबीलोन साम्राज्य ने इसे ध्वस्त कर दिया। साइरस के आदेश से यहूदी लौटे और दूसरे मंदिर का निर्माण किया। उसके बाद रोमन, अरब, क्रूसेडर और ऑटोमन जैसे कई शासकों ने इस धरती पर राज किया।

जायोनी आंदोलन का उदय

उन्नीसवीं सदी के अंत में यूरोप में यहूदियों पर बढ़ते अत्याचारों ने जायोनी आंदोलन को जन्म दिया। थियोडोर हर्जल जैसे नेताओं ने फिलिस्तीन को यहूदी राष्ट्रीय घर बनाने की वकालत की। प्रथम विश्व युद्ध के बाद ऑटोमन साम्राज्य के पतन पर ब्रिटेन ने 1917 में बाल्फोर घोषणा जारी की, जिसमें यहूदियों के लिए राष्ट्रीय घर की सहमति जताई गई। 1930 और 1940 के दशक में होलोकॉस्ट की त्रासदी के बाद लाखों यहूदी यहां पहुंचे, जिससे स्थानीय अरब आबादी के साथ तनाव पैदा हो गया।

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संयुक्त राष्ट्र का विभाजन प्रस्ताव

1947 में संयुक्त राष्ट्र ने फिलिस्तीन को दो राज्यों में बांटने का प्रस्ताव पारित किया: एक यहूदी बहुल और दूसरा अरब बहुल, जबकि यरूशलेम को अंतरराष्ट्रीय शहर बनाने का फैसला हुआ। यहूदियों ने इसे स्वीकार किया, लेकिन अरब पक्ष ने ठुकरा दिया। 14 मई 1948 को डेविड बेन गुरियन ने तेल अवीव में इजरायल राज्य की घोषणा की। अमेरिकी राष्ट्रपति हैरी ट्रूमैन ने इसे तत्काल मान्यता प्रदान कर दी।

युद्धों की श्रृंखला

अगले ही दिन मिस्र, जॉर्डन, सीरिया और अन्य अरब देशों ने हमला बोल दिया, जिससे 1948 का पहला अरब-इजरायल युद्ध भड़क उठा। इजरायल ने जीत हासिल की, लेकिन सात लाख फिलिस्तीनियों को विस्थापित होना पड़ा, जिसे नकबा के नाम से जाना जाता है। इसके बाद 1956 का सुएज संकट, 1967 का छह दिवसीय युद्ध आया, जिसमें इजरायल ने गाजा, वेस्ट बैंक, गोलन हाइट्स और सिनाई पर कब्जा जमाया। 1973 का यॉम किप्पुर युद्ध भी लड़ा गया।

शांति प्रयास और आज का संकट

1979 के कैंप डेविड समझौते से मिस्र के साथ शांति हुई। 1993 के ओस्लो समझौते ने फिलिस्तीनी प्राधिकरण की नींव रखी, लेकिन यह विफल रहा। आज गाजा पट्टी, वेस्ट बैंक की बस्तियां और यरूशलेम का मुद्दा तनाव का मुख्य कारण हैं। हमास जैसे संगठनों के साथ चल रहे संघर्ष ने हाल के वर्षों में हिंसा को बढ़ावा दिया है। दो राष्ट्रों का समाधान ही स्थायी शांति का रास्ता दिखता है, लेकिन इतिहास की गहरी चोटें इसे जटिल बनाती हैं।

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