
उत्तर प्रदेश का आखिरी जिला बलिया केवल अपनी ‘बागी’ तेवरों के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी अद्भुत प्राकृतिक धरोहरों के लिए भी जाना जाता है, यहाँ स्थित सुरहा ताल को एशिया का सबसे लंबा और विशाल प्राकृतिक तालाब (गोखुर झील) माना जाता है लगभग 34.32 वर्ग किलोमीटर के विशाल क्षेत्र में फैली यह झील अपनी जैव-विविधता और ऐतिहासिक महत्व के कारण पर्यटकों और शोधकर्ताओं के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।
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गंगा और सरयू का अनोखा संगम
सुरहा ताल की सबसे बड़ी विशेषता इसका नदियों से जुड़ाव है, यह झील लगभग 23 किलोमीटर लंबे कटहर नाले के जरिए सीधे गंगा नदी से जुड़ी हुई है। मानसून के दौरान जब गंगा और सरयू नदियाँ उफान पर होती हैं, तो उनका पानी इसी नाले के जरिए ताल में प्रवेश करता है, जिससे इसका विस्तार और भी बढ़ जाता है।
जय प्रकाश नारायण पक्षी विहार: विदेशी मेहमानों का डेरा
पर्यावरण संरक्षण को देखते हुए साल 1991 में इसे जय प्रकाश नारायण पक्षी विहार घोषित किया गया था सर्दियों के मौसम में यहाँ रूस और मध्य एशिया से हजारों किलोमीटर का सफर तय कर साइबेरियन क्रेन और सुर्खाब जैसे प्रवासी पक्षी आते हैं।
सुरहा ताल की मुख्य विशेषताएं
- अवस्थिति: बलिया जिला मुख्यालय से करीब 17 किलोमीटर दूर।
- क्षेत्रफल: लगभग 34.32 वर्ग किलोमीटर (करीब 3432 हेक्टेयर)।
- आकार: यह एक प्राकृतिक ‘ऑक्सबो लेक’ (गोखुर झील) है, जो नदी की धारा बदलने से बनी है।
- आजीविका: आसपास के दर्जनों गाँवों के लिए यह मछली पालन और सिंचाई का मुख्य स्रोत है।
इतिहास और पर्यटन
स्थानीय लोगों के अनुसार, इस ताल का नामकरण ‘सुरहा’ यहाँ पाए जाने वाले सुरम्य वातावरण के कारण हुआ है आज यह स्थान नौका विहार (Boating) और बर्ड वाचिंग के लिए पूर्वांचल का एक प्रमुख पर्यटन स्थल बनता जा रहा है, यदि आप भी प्रकृति प्रेमी हैं, तो बलिया का यह ‘विशाल सागर’ आपकी बकेट लिस्ट में जरूर होना चाहिए।
















