बैंक बचत खाते में जरूरी न्यूनतम राशि न रखने वाले ग्राहकों के लिए केंद्रीय रिजर्व बैंक यानी आरबीआई के दिशानिर्देश अब और सख्त हो गए हैं। एक ओर जहां सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक ग्राहकों को राहत दे रहे हैं वहीं निजी बैंक अभी भी जुर्माना वसूलेने को तैयार हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह व्यवस्था ग्राहकों को वित्तीय अनुशासन सिखाने के साथ ही बैंकों की आय बढ़ाने का जरिया भी बन गई है। पिछले साल बैंकों ने ऐसी कमियों पर हजारों करोड़ रुपये वसूले जो आम आदमी के लिए चिंता का विषय है।

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RBI के सख्त दिशानिर्देश
आरबीआई ने वर्षों से चली आ रही प्रक्रिया को मजबूत किया है। अब बैंक खाते में बैलेंस कम होने पर तुरंत ग्राहक को संदेश या ईमेल भेजना पड़ता है। इसके बाद कम से कम तीस दिन का समय दिया जाता है स्थिति सुधारने का। जुर्माना केवल कमी की मात्रा के हिसाब से लगाया जा सकता है न कि निश्चित राशि के रूप में। निष्क्रिय खातों पर कोई शुल्क नहीं वसूला जा सकता। यह बदलाव ग्राहकों को अचानक आश्चर्य से बचाने के लिए हैं लेकिन फिर भी सतर्कता जरूरी है।
सार्वजनिक बैंकों में मिली बड़ी राहत
सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में अब बड़ा परिवर्तन देखने को मिला है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया जैसे प्रमुख बैंक ने शहरी क्षेत्रों में तीन हजार रुपये न्यूनतम औसत मासिक बैलेंस पर जुर्माना माफ कर दिया है। पंजाब नेशनल बैंक में दो हजार रुपये की सीमा पर अब कमी जितनी राशि उतना ही शुल्क लगेगा। ग्राहकों को अलर्ट के बाद पर्याप्त समय मिलता है और खाता ऋण में नहीं जा सकता। इन कदमों से लाखों छोटे खाताधारक लाभान्वित हो रहे हैं खासकर ग्रामीण इलाकों में।
निजी बैंकों की कठोर नीतियां
निजी बैंकों की नीति अभी भी कठोर बनी हुई है। एचडीएफसी बैंक में महानगरों के लिए दस हजार रुपये औसत बैलेंस जरूरी है जिसकी कमी पर तीन सौ से छह सौ रुपये तक वसूल लिए जा सकते हैं। आईसीआईसीआई बैंक में पंद्रह हजार रुपये की सीमा पर अधिकतम पांच सौ रुपये का प्रावधान है। ग्रामीण या अर्धशहरी शाखाओं में यह राशि पांच सौ से एक हजार रुपये तक कम हो जाती है लेकिन शुल्क का अनुपात वही रहता है। बेसिक सेविंग्स या जन धन खाते शून्य बैलेंस वाले हैं इसलिए उन पर कोई जोखिम नहीं।
विशेषज्ञों की सलाह और भविष्य
आर्थिक साक्षरता को बढ़ावा देने वाले जानकारों का मत है कि ज्यादा बैलेंस रखने से निःशुल्क चेकबुक और लेन देन की सुविधा मिलती है। संसदीय समितियों ने भी इन्हीं शुल्कों पर सवाल उठाए हैं और इन्हें कम करने की मांग की है। आरबीआई गवर्नर ने पारदर्शिता पर जोर दिया है जिससे भविष्य में और सुधार संभव हैं।
ग्राहकों को सलाह दी जाती है कि बैंक की आधिकारिक वेबसाइट या मोबाइल एप पर नियम जांच लें। स्वचालित बैलेंस ट्रांसफर जैसी सुविधाएं अपनाएं। यदि अनुचित शुल्क लगे तो तुरंत शिकायत दर्ज करें। ये नियम डिजिटल बैंकिंग को प्रोत्साहित करने के साथ ग्राहक हितों की रक्षा भी करते हैं। सजग रहें तो कोई नुकसान नहीं होगा।
















