
भारत के जनसांख्यिकीय इतिहास में कल एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है, कल, 1 अप्रैल 2026 से देश की पहली ‘डिजिटल जनगणना’ का औपचारिक शंखनाद हो रहा है रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण के नेतृत्व में इस विशाल अभियान का पहला चरण शुरू किया जा रहा है, जो अगले छह महीनों यानी 30 सितंबर 2026 तक चलेगा।
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बिना किसी कागजी सबूत के दर्ज होगी डिटेल
इस बार की जनगणना की सबसे बड़ी विशेषता इसकी सरलता है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि नागरिकों को अपनी जानकारी दर्ज कराने के लिए किसी भी भौतिक दस्तावेज (Document) जैसे आधार कार्ड या वोटर आईडी दिखाने की आवश्यकता नहीं होगी। प्रगणक (Enumerators) आपके घर आएंगे और आपके द्वारा मौखिक रूप से दी गई जानकारी को सीधे मोबाइल ऐप में दर्ज करेंगे।
33 सवालों की सूची जारी: क्या-क्या पूछा जाएगा?
जनगणना के पहले चरण में मुख्य रूप से ‘मकान सूचीकरण और आवास गणना’ (Houselisting and Housing Census) पर ध्यान केंद्रित किया गया है इसके लिए 33 सवालों की एक विस्तृत सूची जारी की गई है:
- आवास की स्थिति: घर की बनावट, इस्तेमाल की गई सामग्री (ईंट, पत्थर या कंक्रीट) और घर में रहने वाले कमरों की संख्या।
- बुनियादी सुविधाएं: पीने के पानी का मुख्य स्रोत, बिजली कनेक्शन, शौचालय का प्रकार और रसोई घर में ईंधन (LPG/PNG) की उपलब्धता।
- डिजिटल और भौतिक संपत्ति: क्या आपके पास रेडियो, टीवी, इंटरनेट, लैपटॉप, स्मार्टफोन, साइकिल या कार है?
- खान-पान: परिवार में मुख्य रूप से खाया जाने वाला अनाज कौन सा है?
- परिवार का विवरण: मुखिया का नाम, जाति (SC/ST/अन्य) और परिवार में मौजूद विवाहित जोड़ों की जानकारी।
लिव-इन कपल्स और गोपनीयता पर बड़ा फैसला
इस जनगणना में सामाजिक बदलावों को भी जगह दी गई है। यदि कोई जोड़ा लिव-इन रिलेशनशिप में है और खुद को स्थायी मानता है, तो उन्हें ‘विवाहित जोड़ा’ के रूप में ही दर्ज किया जाएगा। साथ ही, सरकार ने भरोसा दिलाया है कि नागरिकों का डेटा पूरी तरह सुरक्षित और गोपनीय रहेगा, जिसका उपयोग केवल जनकल्याणकारी नीतियों के निर्माण के लिए होगा।
सेल्फ-एन्युमरेशन की भी सुविधा
डिजिटल इंडिया को बढ़ावा देते हुए सरकार ने ‘स्व-गणना’ (Self-Enumeration) का विकल्प भी दिया है, नागरिक जनगणना पोर्टल पर जाकर 16 विभिन्न भाषाओं में खुद अपनी जानकारी भर सकते हैं।
बता दें कि इस महा-अभियान का दूसरा चरण फरवरी 2027 में शुरू होगा, जिसमें जनसंख्या की मुख्य गणना के साथ-साथ पहली बार डिजिटल रूप से जाति आधारित डेटा भी जुटाया जाएगा।
















