सरकारी नौकरियों में तैनात करोड़ों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशन लेने वालों के लिए अच्छी खबर सामने आ रही है। महंगाई भत्ता यानी DA में दो से तीन प्रतिशत की बढ़ोतरी मार्च महीने के अंत तक केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी पा सकता है। अभी 58 प्रतिशत के स्तर पर चल रहा यह भत्ता 60 या इससे आगे 61 प्रतिशत तक जा सकता है। यह बदलाव पहली जनवरी 2026 से लागू होगा, जिसका फायदा जनवरी से मार्च तक के एरियर के साथ तुरंत मिलेगा। महंगाई के बढ़ते आंकड़ों ने सरकार को यह कदम उठाने के लिए प्रेरित किया है।

वर्तमान हालात को देखें तो दिसंबर 2025 के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आंकड़े इस बढ़ोतरी का आधार बन चुके हैं। न्यूनतम दो प्रतिशत की वृद्धि लगभग तय मानी जा रही है, जबकि कुछ आंकड़ों के हिसाब से तीन प्रतिशत तक पहुंचना संभव है। यह सातवें वेतन आयोग के दायरे में हो रहा है, क्योंकि आठवें आयोग की रूपरेखा अभी पूरी तरह साकार नहीं हुई। पिछले वर्षों में अक्टूबर 2025 में तीन प्रतिशत और अप्रैल में दो प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई थी। इस बार होली के ठीक पहले यह उपहार कर्मचारियों को मिलने की पूरी संभावना है।
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बढ़ोतरी का सीधा असर जेब पर
सभी पे लेवल वाले कर्मचारियों को इसका लाभ होगा। उदाहरण के तौर पर लेवल-1 के 18,000 रुपये बेसिक पे पर दो प्रतिशत बढ़ोतरी से मासिक आमदनी करीब 28,800 रुपये और तीन प्रतिशत पर 28,980 रुपये तक पहुंच जाएगी। इसी तरह लेवल-10 के 56,100 रुपये वाले को 89,760 से 90,321 रुपये का फायदा होगा। सबसे ऊपरी लेवल-18 के 2.5 लाख बेसिक पे पर यह 4 लाख से 4.02 लाख रुपये हो सकता है। कुल मिलाकर 48 लाख कर्मचारियों और 65 लाख पेंशनभोगियों को सालाना 10,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त लाभ मिलेगा। पेंशनरों को इसे महंगाई राहत के रूप में हासिल होगा।
कर्मचारी संगठनों की मांग और सरकार का रुख
कर्मचारी यूनियनों ने लंबे समय से DA फॉर्मूले में बदलाव की बात उठाई है, खासकर जब यह 55 प्रतिशत को पार कर गया। वैश्विक महंगाई और घरेलू मूल्यवृद्धि ने स्थिति को और नाजुक बना दिया। वित्त मंत्रालय ने कैलकुलेशन खत्म कर कैबिनेट को भेज दिया है। अगली बैठक में इसे प्राथमिकता मिलने के संकेत हैं। यूनियन नेता इसे ऐतिहासिक मान रहे हैं, जो मध्यम वर्ग की क्रय शक्ति को सहारा देगा।
आगे की राह में क्या?
आठवें वेतन आयोग पर बहस जारी है, लेकिन फिलहाल DA सातवें आयोग पर टिका रहेगा। सरकार बजट संतुलन के साथ कर्मचारी हितों को जोड़ने की कोशिश में लगी है। मार्च-अप्रैल की समयसीमा में घोषणा से उत्साह बढ़ रहा है। कर्मचारी संगठन सतर्क हैं कि देरी न हो। कुल मिलाकर यह कदम आर्थिक स्थिरता और हितों के संतुलन का प्रतीक बनेगा। अंतिम फैसला कैबिनेट का, लेकिन हवा सकारात्मक बह रही है।

















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