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दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर सफर हुआ महंगा! 1 अप्रैल से बढ़ जाएगा टोल टैक्स; जेब पर पड़ेगा सीधा असर, देखें नई लिस्ट

दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर सफर 1 अप्रैल से महंगा हो जाएगा। टोल टैक्स में छोटी‑सी बढ़ोतरी से कार, बस, ट्रक और व्यावसायिक वाहन मालिकों की जेब पर रोजाना और महीने भर का अतिरिक्त दबाव पड़ेगा।

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दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर रोजाना आवाजाही करने वाले यात्रियों के लिए अब यात्रा खर्च और बढ़ने वाला है। 1 अप्रैल 2026 से यहां लगने वाला टोल टैक्स नए रेट के साथ लागू होगा, जिससे अधिकांश वाहन श्रेणियों पर प्रति यात्रा थोड़ी अतिरिक्त राशि देनी पड़ेगी।

दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर सफर हुआ महंगा! 1 अप्रैल से बढ़ जाएगा टोल टैक्स; जेब पर पड़ेगा सीधा असर, देखें नई लिस्ट

टोल की नई दरें क्या हैं?

कार या जीप जैसे हल्के वाहनों के लिए दिल्ली से मेरठ की एक तरफ की यात्रा पर टोल पहले 165 रुपये था, जो अब 170 रुपये हो जाएगा। ऐसे में जो यात्री रोज दो तरफ आते‑जाते हैं, उन्हें प्रतिदिन 10 रुपये ज्यादा टोल देना होगा, जो महीने भर में करीब 300 रुपये के बराबर बनता है। यह बढ़ोतरी आम यात्री, कैब या टैक्सी ड्राइवर और ऑफिस जाने वाले कर्मचारियों की जेब पर सीधा असर डालेगी।

हल्के व्यावसायिक वाहनों यानी छोटे कमर्शियल व्याहनों पर भी टोल थोड़ा बढ़ा है। इन वाहनों के लिए टोल लगभग 265-270 रुपये से बढ़कर 275 रुपये के आसपास पहुंच गया है। यह इजाफा उन ड्राइवरों और व्यापारियों के लिए महत्वपूर्ण है, जो दिन‑रात माल ढुलाई या छोटे‑मोटे सामान की आपूर्ति के लिए इस रूट का इस्तेमाल करते हैं।

भारी वाहनों पर दबाव ज्यादा

बस और ट्रक जैसे भारी वाहनों के लिए टोल में बढ़ोतरी और ज्यादा दिखती है। इस वर्ग के वाहनों पर टोल लगभग 560-570 रुपये से बढ़कर कुछ सेक्शन पर 580-590 रुपये तक पहुंच जाता है। भारी ट्रक, ट्रैलर और बड़े उद्योग संबंधित व्हीकल्स पर टोल लगभग 1085-1100 रुपये से बढ़कर 1125 रुपये तक हो गया है, जिससे ट्रांसपोर्टर्स और लॉजिस्टिक्स सेक्टर को सीधा आर्थिक दबाव झेलना पड़ सकता है।

ट्रांसपोर्टर्स का कहना है कि ऐसी बढ़त सीधे मालभाड़े और ऑपरेशन कॉस्ट में झलक सकती है। विशेष रूप से मेरठ, गाजियाबाद, डासना और आसपास के शहरों से दिल्ली की ओर जाने वाले मालवाहक वाहनों के लिए यह अतिरिक्त बोझ लॉजिस्टिक्स कॉस्ट को ऊपर खींच सकता है। कई ड्राइवर मानते हैं कि टोल और फ्यूल की लगातार बढ़ती कीमत के बीच उनकी आय लगातार दबाव में आ रही है।

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रोजाना यात्रा करने वालों पर असर

टोल की यह बढ़त न सिर्फ एकल यात्रा को महंगा बनाएगी बल्कि रेगुलर ट्रैवलर्स के लिए मासिक खर्च में भी इजाफा करेगी। जिन यात्रियों के पास NHAI द्वारा अनुमोदित मासिक या वार्षिक टोल पास हैं, उनकी फीस भी थोड़ी बढ़ी है। इससे यह साफ है कि सरकार और अधिकारी टोल इनकम को बनाए रखने के लिए हर साल हल्की‑फुल्की एडजस्टमेंट करने की रणनीति पर चल रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि टोल बढ़ोतरी को सिर्फ सालाना इंफ्लेशन और रोड मेन्टेनेंस की लागत के आधार पर समझाया जाता है, लेकिन दूसरी ओर यात्रियों की क्षमता और आर्थिक बोझ को कम जगह दी जा रही है। इस एक्सप्रेसवे का इस्तेमाल जाम से बचने के लिए ज्यादातर लोगों द्वारा किया जाता है, लेकिन टोल की लगातार बढ़ती दरें कई बार लोगों को फिर से पुराने हाईवे या वैकल्पिक रूट पर लौटने के लिए मजबूर कर सकती हैं।

क्या रहेगा व्यावहारिक रास्ता

विशेषज्ञ सुझाव देते हैं कि जो लोग अक्सर दिल्ली-मेरठ या इसके आसपास के सेक्शन पर यात्रा करते हैं, उन्हें अब अपनी मासिक टोल लागत का अनुमान लगाना चाहिए। जहां तक संभव हो, मासिक या वार्षिक पास जैसे विकल्पों का इस्तेमाल करने से थोड़ी बचत की संभावना बनी रहती है। भविष्य में टोल नीति को और पारदर्शी और संतुलित बनाने की जरूरत महसूस की जा रही है, ताकि नियमित यात्री, कैब ड्राइवर और ट्रांसपोर्टर सभी के लिए बोझ बहुत ज्यादा न बढ़ जाए।

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