बैंक सेविंग अकाउंट में अक्सर बड़े लेनदेन करने वाले ग्राहक अब सतर्क हो जाएं। आयकर विभाग हर संदिग्ध गतिविधि पर पैनी नजर रखे हुए है। खासकर कैश जमा या निकासी के मामले में अगर सीमाएं लांघी गईं, तो नोटिस घर तक पहुंच सकता है। यह नियम टैक्स चोरी रोकने और वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए बने हैं।

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कैश लेनदेन की सालाना सीमा क्या है?
एक वित्तीय वर्ष में सेविंग अकाउंट से कुल कैश जमा या निकासी दस लाख रुपये से ज्यादा हो जाए, तो बैंक खुद ही विभाग को सूचना दे देता है। यह अवधि एक अप्रैल से तीस एक मार्च तक चलती है। अगर आपका खाता सामान्य कमाई से मेल नहीं खाता, तो जांच की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। छोटे जमा ठीक हैं, लेकिन बार-बार ऊंची रकम उठाने से अलर्ट बज जाता है।
एक दिन में कितना कैश संभव है?
कानून साफ तौर पर कहता है कि एक ही दिन में दो लाख रुपये से अधिक का कैश लेनदेन न करें। चाहे वह जमा हो या प्राप्ति, उल्लंघन पर भारी जुर्माना लग सकता है। इसके अलावा पचास हजार रुपये से ऊपर का कैश जमा करते समय पैन कार्ड दिखाना जरूरी होता है। ये पाबंदियां काले धन पर अंकुश लगाने के मकसद से हैं।
विभाग क्यों निगरानी करता है?
आयकर विभाग अब डिजिटल ट्रांजेक्शन भी स्कैन कर रहा है। यूपीआई या चेक से भी अगर सालाना लेनदेन चालीस-पचास लाख तक पहुंच जाए और यह आपकी आय घोषणा से मेल न खाए, तो सवाल खड़े हो जाते हैं। उदाहरण के तौर पर कई लोग बिना सोचे अचानक रकम जमा कर देते हैं, जो बाद में परेशानी का सबब बनता है। अकाउंट में बैलेंस जितना चाहें रख सकते हैं, मगर उसका स्रोत साफ होना चाहिए।
नोटिस से कैसे बचें?
सबसे आसान उपाय है कैश से परहेज करें। डिजिटल तरीके अपनाएं जैसे यूपीआई, एनईएफटी या आरटीजीएस। ये ट्रेस हो जाते हैं और जांच में आसानी होती है। अगर नोटिस आ भी जाए, तो दस्तावेज तैयार रखें। सैलरी प्रमाणपत्र, बिक्री का बिल या लोन पेपर जमा करने से मामला सुलझ जाता है। वर्तमान में कोई नई सीमा घोषित नहीं हुई है, पुराने नियम ही जारी हैं।
बेहतर विकल्प चुनें
सेविंग अकाउंट को छोटे-मोटे लेनदेन तक ही सीमित रखें। बड़े अमाउंट के लिए करेंट अकाउंट या फिक्स्ड डिपॉजिट ज्यादा सुरक्षित हैं। करदाता अगर नियमों का पालन करें, तो कोई दिक्कत नहीं। विभाग का लक्ष्य टैक्स चोरों को पकड़ना है, न कि ईमानदार लोगों को तंग करना। सजग रहें, परेशानी न करें।
















