
अगर आप किराये के मकान में रहते हैं या अपना घर किराये पर देते हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है आज से रेंट एग्रीमेंट (Rent Agreement) से जुड़े नियमों में कड़ाई कर दी गई है, अब रेंट एग्रीमेंट बनवाने में की गई एक छोटी सी लापरवाही आपकी जेब पर भारी पड़ सकती है और आपको कानूनी पचड़ों में फंसा सकती है।
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नियमों की अनदेखी पर ₹1 लाख तक का जुर्माना
नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, रेंट एग्रीमेंट में गलत जानकारी देना या अनिवार्य शर्तों का उल्लंघन करना अब दंडनीय अपराध की श्रेणी में आएगा। सरकार ने पारदर्शिता लाने और विवादों को कम करने के लिए जुर्माने की राशि बढ़ाकर ₹1 लाख तक कर दी है। यह नियम रिहायशी और व्यावसायिक दोनों तरह की संपत्तियों पर लागू होगा।
पुलिस वेरिफिकेशन न कराने पर जेल की शर्त
सुरक्षा के लिहाज से अब किरायेदार का पुलिस वेरिफिकेशन (Police Verification) अनिवार्य कर दिया गया है, यदि मकान मालिक अपने किरायेदार का रिकॉर्ड स्थानीय पुलिस स्टेशन में दर्ज नहीं कराता है, तो भारी जुर्माने के साथ-साथ जेल की सजा का भी प्रावधान है। कुछ राज्यों में इसे ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत लागू किया जा रहा है।
नए नियमों की मुख्य बातें
- अनिवार्य रजिस्ट्रेशन: अब हर रेंट एग्रीमेंट का लिखित और रजिस्टर्ड होना जरूरी है, मौखिक समझौता अब मान्य नहीं होगा।
- डिजिटल स्टैम्पिंग: एग्रीमेंट के लिए डिजिटल स्टैम्प पेपर का उपयोग अनिवार्य किया जा सकता है ताकि धोखाधड़ी रोकी जा सके।
- सिक्योरिटी डिपॉजिट की सीमा: मकान मालिक अब मनमाना एडवांस नहीं वसूल सकेंगे रिहायशी मकानों के लिए अधिकतम 2 महीने का किराया ही सिक्योरिटी के तौर पर लिया जा सकेगा।
- किराया वृद्धि के नियम: बिना पूर्व सूचना या एग्रीमेंट में जिक्र किए बिना बीच में किराया बढ़ाना अब मुमकिन नहीं होगा।
विवादों से बचने के लिए क्या करें?
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि मकान मालिक और किरायेदार दोनों को एग्रीमेंट साइन करने से पहले सभी क्लॉज (Clauses) को ध्यान से पढ़ना चाहिए, एग्रीमेंट में रखरखाव (Maintenance), बिजली-पानी के बिल और नोटिस पीरियड का स्पष्ट उल्लेख होना चाहिए।
यदि आप भी आज कोई नया समझौता करने जा रहे हैं, तो सुनिश्चित करें कि वह नए नियमों के अनुरूप हो, अन्यथा आपको भारी आर्थिक नुकसान और कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
















