
भीषण गर्मी और बढ़ते पारे के बीच घरों में एयर कंडीशनर (AC) का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है लेकिन महीने के अंत में बिजली का बिल देख आम जनता के पसीने छूट रहे हैं विशेषकर वे लोग ज्यादा परेशान हैं जिनके घरों में 1.5 टन का पुराना AC लगा है, विशेषज्ञों के अनुसार, एक पुराना AC न केवल कूलिंग कम करता है, बल्कि बिजली की भी भारी खपत करता है।
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पुराना AC: जेब पर भारी पड़ रहा है ‘सफेद हाथी’
आंकड़ों के मुताबिक, एक पुराना 1.5 टन का नॉन-इन्वर्टर AC औसतन 1.5 से 2 यूनिट प्रति घंटा बिजली की खपत करता है यदि आप इसे रोजाना 10 घंटे चलाते हैं, तो यह महीने भर में लगभग 450 से 600 यूनिट बिजली सिर्फ AC के नाम कर देता है। मौजूदा बिजली दरों के हिसाब से इसका खर्च 4,000 से 6,000 रुपये तक जा सकता है।
ये 2 सेटिंग्स बचाएंगी आपका पैसा
भारी-भरकम बिल से बचने के लिए तकनीकी विशेषज्ञों ने दो मुख्य सेटिंग्स में बदलाव का सुझाव दिया है:
- तापमान का सही चुनाव (24°C का जादुई आंकड़ा): अक्सर लोग कमरा जल्दी ठंडा करने के लिए AC को 16 या 18 डिग्री पर चला देते हैं। इससे कंप्रेसर पर अत्यधिक दबाव पड़ता है और वह बिना रुके चलता रहता है। वैज्ञानिकों के अनुसार, AC का तापमान 24°C से 26°C के बीच रखना सबसे आदर्श है। हर एक डिग्री तापमान बढ़ाने पर आप करीब 6% बिजली की बचत कर सकते हैं।
- ‘ड्रय मोड’ और ‘ऑटो मोड’ का इस्तेमाल: मानसून या अधिक उमस वाले मौसम में AC को ‘Dry Mode’ पर चलाएं। यह मोड हवा से नमी सोख लेता है, जिससे कम कूलिंग में भी बेहतर ठंडक का अहसास होता है और कंप्रेसर कम बिजली लेता है। साथ ही, ‘Auto Mode’ सेट करने से कमरा ठंडा होते ही ब्लोअर की स्पीड अपने आप नियंत्रित हो जाती है।
सर्विसिंग और फिल्टर की सफाई है जरूरी
लेख में यह भी स्पष्ट किया गया है कि पुराने AC की समय पर सर्विसिंग न कराना बिल बढ़ने का एक बड़ा कारण है, गंदे एयर फिल्टर के कारण मशीन को हवा खींचने में ज्यादा मशक्कत करनी पड़ती है, जिससे बिजली की खपत बढ़ जाती है, हर 15 दिन में फिल्टर साफ करना और साल में दो बार पेशेवर सर्विसिंग कराना अनिवार्य है।
















