Join Youtube

MP के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की छुट्टियां कैंसिल; मई की धूप में सप्लीमेंट्री एग्जाम ड्यूटी का आदेश जारी

मध्य प्रदेश में सरकारी स्कूल शिक्षकों की मई-जून छुट्टियां रद्द। सप्लीमेंट्री परीक्षाओं के लिए सख्त ड्यूटी, 7 दिन गैरहाजिर पर नौकरी खतरे में। गर्मी में नाराजगी, सरकार छात्र हित बता रही।

Published On:

मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढ़ाने वाले लाखों शिक्षकों के लिए गर्मियों की छुट्टियां अब दूर की कौड़ी बन गई हैं। राज्य सरकार ने मई और जून में होने वाली सप्लीमेंट्री परीक्षाओं को सुचारू रूप से चलाने के लिए शिक्षकों की सभी प्रकार की छुट्टियां रद्द कर दी हैं। इस फैसले से शिक्षक समुदाय में भारी असंतोष है, खासकर जब मई की तेज धूप में स्कूलों में ड्यूटी निभानी होगी।

MP के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की छुट्टियां कैंसिल; मई की धूप में सप्लीमेंट्री एग्जाम ड्यूटी का आदेश जारी

आदेश की मुख्य बातें

सरकार ने साफ लफ्जों में कहा है कि अगले दो से तीन महीनों तक कोई भी छुट्टी मंजूर नहीं होगी। इसमें ग्रीष्मकालीन अवकाश भी शामिल है। यदि कोई शिक्षक सात दिन से ज्यादा अनुपस्थित रहा, तो उसकी नौकरी पर बन सकती है। तबादले रुक गए हैं और कुछ विशेष छुट्टियों पर भी रोक लगा दी गई है। इसका मकसद परीक्षा केंद्रों पर पर्याप्त स्टाफ उपलब्ध कराना है, ताकि कोई गड़बड़ी न हो। शिक्षा विभाग का कहना है कि छात्रों का भविष्य दांव पर लगने नहीं दिया जाएगा।

परीक्षाओं का पूरा शेड्यूल

इस साल 10वीं और 12वीं की द्वितीय परीक्षाएं मई के पहले भाग में होंगी। 10वीं का पेपर सात से 19 मई तक चलेगा, जबकि 12वीं का सात से 25 मई तक। छोटी कक्षाओं में भी कमियां पूरी करने के लिए सप्लीमेंट्री परीक्षाएं तय हैं। पांचवीं और आठवीं के छात्र मई में ही परीक्षा देंगे। नौवीं और 11वीं की द्वितीय परीक्षाएं जून के पहले दो हफ्तों में तीन से 13 तारीख तक होंगी। इन परीक्षाओं में लाखों बच्चे शामिल होंगे, इसलिए अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है।

शिक्षकों की परेशानी बढ़ी

शिक्षक इसे अपनी सेहत पर हमला बता रहे हैं। गर्मी के इन दिनों में बिना एयर कंडीशनिंग वाले स्कूलों में घंटों ड्यूटी करना मुश्किल होगा। एक शिक्षक ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि यह फैसला बिना सोचे लिया गया लगता है। संगठनों ने चेतावनी दी है कि वे कोर्ट का रुख कर सकते हैं। उनका सुझाव है कि परीक्षा ड्यूटी के लिए रिटायर्ड कर्मचारियों या निजी एजेंसियों का सहारा लिया जाए।

सरकार का रुख मजबूत

दूसरी ओर, शिक्षा मंत्री ने साफ किया है कि अनुशासन सबसे ऊपर है। पहले परीक्षाओं में नाकामी के बाद सप्लीमेंट्री राउंड जरूरी है। लापरवाही से बचने के लिए यह कदम उठाया गया। अधिकारी मानते हैं कि इससे परीक्षा प्रक्रिया मजबूत होगी और छात्रों को फायदा पहुंचेगा।

यह विवाद मध्य प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था की कमजोरियों को सामने ला रहा है। छात्रों की सफलता के नाम पर शिक्षकों का मनोबल टूटना ठीक नहीं। आने वाले दिनों में संगठनों की चाल पर सबकी नजर टिकी है। क्या सरकार कोई नरमी दिखाएगी या सख्ती जारी रखेगी, यह समय बताएगा। 

Leave a Comment

अन्य संबंधित खबरें