
केंद्र सरकार ने देशभर के करोड़ों WhatsApp, Telegram और Signal यूजर्स को एक बड़ी राहत दी है, दूरसंचार विभाग (DoT) ने मैसेजिंग ऐप्स के लिए अनिवार्य ‘सिम बाइंडिंग’ (SIM Binding) नियम को लागू करने की समयसीमा को आगे बढ़ा दिया है, अब यह नियम 31 दिसंबर 2026 तक लागू किया जाएगा, जिससे यूजर्स को तकनीकी बदलावों के लिए पर्याप्त समय मिल गया है।
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क्या है नया अपडेट?
इससे पहले सरकार ने इस नियम को लागू करने के लिए 1 मार्च 2026 की तारीख तय की थी। हालांकि, टेक दिग्गजों द्वारा Android और iOS जैसे ऑपरेटिंग सिस्टम में बड़े बदलावों की जरूरत और तकनीकी चुनौतियों का हवाला देने के बाद, सरकार ने इस डेडलाइन को साल के अंत तक टालने का फैसला किया है।
‘Auto-Logout’ का डर हुआ खत्म
यूजर्स के लिए सबसे सुखद खबर यह है कि सरकार ने WhatsApp Web और अन्य डेस्कटॉप वर्जन के लिए पहले प्रस्तावित ‘6 घंटे के अनिवार्य ऑटो-लॉगआउट’ नियम को फिलहाल वापस ले लिया है।
अब कंपनियों को हर 6 घंटे में यूजर को लॉगआउट करने के बजाय AI-आधारित रिस्क एनालिसिस (Risk Analysis) का उपयोग करने की छूट दी गई है। इसका मतलब है कि आपका डेस्कटॉप अकाउंट अब बार-बार लॉगआउट नहीं होगा, बल्कि सिस्टम केवल तभी लॉगआउट करेगा जब उसे किसी संदिग्ध गतिविधि या सुरक्षा जोखिम का आभास होगा।
क्यों जरूरी है ‘सिम बाइंडिंग’?
सिम बाइंडिंग एक ऐसी सुरक्षा तकनीक है जिसका इस्तेमाल फिलहाल बैंकिंग ऐप्स (जैसे Google Pay या PhonePe) में किया जाता है। इसके लागू होने के बाद:
- आपका WhatsApp अकाउंट केवल उसी फोन में चलेगा जिसमें वह सिम कार्ड सक्रिय (Active) रूप से लगा होगा।
- यदि फोन से सिम निकाल लिया जाता है, तो मैसेजिंग ऐप काम करना बंद कर देगा।
- इसका मुख्य उद्देश्य ‘डिजिटल अरेस्ट’ और फर्जी कॉल्स जैसे बढ़ते साइबर फ्रॉड पर लगाम लगाना है, ताकि हर अकाउंट एक सत्यापित KYC सिम से जुड़ा रहे।
यूजर्स पर क्या होगा असर?
आम जनता के लिए फिलहाल स्थिति सामान्य बनी रहेगी आपको अपने ऐप के इस्तेमाल के तरीके में तुरंत कोई बदलाव करने की जरूरत नहीं है, हालांकि, भविष्य में सिम बाइंडिंग अनिवार्य होने पर आपको यह सुनिश्चित करना होगा कि आपका प्राइमरी सिम कार्ड हमेशा उसी डिवाइस में रहे जिसमें आप WhatsApp का उपयोग कर रहे हैं।
















