
भारत सरकार ने हाल ही में प्रॉपर्टी से जुड़े टैक्स नियमों (LTCG) और रिपोर्टिंग सीमाओं में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं, यह खबर उन सभी के लिए महत्वपूर्ण है जो मकान या जमीन के लेन-देन की योजना बना रहे हैं।
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लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) टैक्स में बदलाव
अचल संपत्ति (जैसे मकान या जमीन) को बेचने पर होने वाले मुनाफे पर लगने वाले टैक्स की दरों को बदल दिया गया है:
- नया टैक्स रेट: अब प्रॉपर्टी बेचने पर होने वाले लॉन्ग टर्म मुनाफे पर 12.5% की दर से टैक्स लगेगा।
- इंडेक्सेशन का लाभ हटा: पहले यह दर 20% थी और इसमें ‘इंडेक्सेशन’ (महंगाई के अनुसार खरीद मूल्य को एडजस्ट करना) की सुविधा मिलती थी। अब नई संपत्तियों के लिए इंडेक्सेशन खत्म कर दिया गया है।
- पुराने खरीदारों को विकल्प: यदि आपने 23 जुलाई 2024 से पहले प्रॉपर्टी खरीदी है, तो आपके पास दो विकल्प हैं:
- 12.5% टैक्स (बिना इंडेक्सेशन के)
- 20% टैक्स (इंडेक्सेशन के लाभ के साथ)
आप वह विकल्प चुन सकते हैं जिसमें आपको कम टैक्स देना पड़े।
PAN कार्ड और रिपोर्टिंग की सीमा में बदलाव (प्रस्तावित)
आयकर विभाग ने छोटे ट्रांजैक्शन को ट्रैक करने के नियमों में ढील देने का प्रस्ताव रखा है:
- ₹20 लाख की नई सीमा: नए नियमों (जो 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी हो सकते हैं) के अनुसार, ₹20 लाख तक के प्रॉपर्टी ट्रांजैक्शन के लिए अब PAN कार्ड देना अनिवार्य नहीं होगा।
- वर्तमान स्थिति: अभी ₹1 लाख से अधिक के किसी भी सौदे में पैन कार्ड की जानकारी साझा करना जरूरी होता है।
आपकी जेब पर कितना बढ़ेगा बोझ?
- किसे होगा फायदा: उन लोगों को फायदा होगा जिनकी प्रॉपर्टी की वैल्यू बहुत तेजी से बढ़ी है उनके लिए 12.5% का फ्लैट रेट पुराने 20% (इंडेक्सेशन के साथ) से सस्ता पड़ सकता है।
- किसे होगा नुकसान: यदि आपकी प्रॉपर्टी की वैल्यू महंगाई दर (Inflation) से कम रफ्तार से बढ़ी है, तो इंडेक्सेशन न मिलने के कारण आपको अधिक टैक्स देना पड़ सकता है।
- छोटे खरीदारों को राहत: ₹20 लाख तक के छोटे प्लॉट या मकान खरीदने वालों के लिए कागजी कार्रवाई कम होगी।
यदि आपने बहुत साल पहले कम कीमत पर जमीन खरीदी थी, तो 20% (इंडेक्सेशन के साथ) वाला पुराना विकल्प आपके लिए अब भी बेहतर साबित हो सकता है।
















