
देश में चुनावी माहौल के बीच ‘बायोमेट्रिक पहचान’ को लेकर बहस तेज हो गई है इसी मुद्दे पर दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए Supreme Court of India ने केंद्र सरकार और Election Commission of India से जवाब तलब किया है।
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क्या है पूरा मामला?
याचिका में मांग की गई है कि मतदान प्रक्रिया को और पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए बायोमेट्रिक पहचान प्रणाली को लागू किया जाए। याचिकाकर्ता का कहना है कि इससे फर्जी मतदान और डुप्लीकेट वोटिंग पर रोक लगाई जा सकती है।
सुप्रीम कोर्ट का रुख
मामले की सुनवाई के दौरान Supreme Court of India ने इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए केंद्र सरकार और Election Commission of India से विस्तृत जवाब मांगा है। कोर्ट ने यह जानना चाहा है कि क्या मौजूदा चुनावी व्यवस्था में बायोमेट्रिक सिस्टम लागू करना संभव है या नहीं।
क्या होंगे संभावित बदलाव?
अगर बायोमेट्रिक पहचान को मंजूरी मिलती है, तो मतदान प्रक्रिया में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं इससे वोटर की पहचान और अधिक सटीक हो जाएगी और चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता बढ़ सकती है।
उठ रहे हैं ये सवाल
हालांकि, इस प्रस्ताव को लेकर कई सवाल भी उठ रहे हैं, जैसे:
- डेटा प्राइवेसी और सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी?
- क्या देशभर में यह तकनीक लागू करना संभव है?
- ग्रामीण क्षेत्रों में इसकी व्यवस्था कैसे की जाएगी?
आगे क्या?
अब इस मामले में अगली सुनवाई के दौरान केंद्र और चुनाव आयोग का पक्ष सामने आएगा इसके बाद ही यह तय होगा कि बायोमेट्रिक पहचान को लेकर आगे क्या कदम उठाए जाएंगे।
















