
सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे लाखों युवाओं के लिए बड़ी खुशखबरी है, कर्मचारी चयन आयोग (SSC) ने अपनी मूल्यांकन पद्धति और ‘आपत्ति प्रबंधन प्रणाली’ (Objection Management System) में क्रांतिकारी बदलाव का ऐलान किया है, 10 अप्रैल 2026 को जारी नए नियमों के तहत, अब परीक्षा के दौरान होने वाली तकनीकी या मानवीय गलतियों का खामियाजा छात्रों को नहीं भुगतना होगा।
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क्या है नया नियम?
नए नोटिस के मुताबिक, यदि परीक्षा में कोई प्रश्न गलत, अधूरा या स्पष्ट नहीं पाया जाता है, तो उसे तत्काल निरस्त माना जाएगा, सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उस विशेष प्रश्न के लिए सभी उम्मीदवारों को पूरे अंक (Full Marks) दिए जाएंगे खास बात यह है कि बोनस अंक उन छात्रों को भी मिलेंगे जिन्होंने उस सवाल को हल करने की कोशिश नहीं की थी।
इन स्थितियों में भी मिलेगा लाभ
- एक से अधिक सही विकल्प: यदि किसी प्रश्न के दो या दो से अधिक विकल्प सही पाए जाते हैं, तो उन सभी अभ्यर्थियों को पूरे अंक दिए जाएंगे जिन्होंने किसी भी एक सही विकल्प पर टिक किया है।
- आउट ऑफ सिलेबस सवाल: पाठ्यक्रम से बाहर के सवालों को भी अब निरस्त श्रेणी में रखा जाएगा और उनके बदले बोनस अंक मिलेंगे।
- अनुवाद की त्रुटि: यदि हिंदी या अंग्रेजी अनुवाद में कोई बड़ी गलती पाई जाती है, तो प्रभावित भाषा समूह के उम्मीदवारों को राहत दी जाएगी।
उम्मीदवारों के लिए पारदर्शिता का नया दौर
आयोग का मानना है कि इस कदम से आंसर-की (Answer Key) के मूल्यांकन में पारदर्शिता आएगी और कोर्ट केसों की संख्या में कमी होगी। यह नियम SSC CGL, CHSL, MTS और GD समेत सभी प्रमुख परीक्षाओं पर तत्काल प्रभाव से लागू माना जाएगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस बदलाव से उन मेधावी छात्रों को सबसे ज्यादा फायदा होगा जो अक्सर गलत सवालों की वजह से कट-ऑफ की रेस से बाहर हो जाते थे। विस्तृत जानकारी के लिए छात्र SSC की आधिकारिक वेबसाइट ssc.gov.in पर जा सकते हैं।
















