Join Youtube

राजस्थान से निकलकर गुजरात में गायब हो जाती है यह नदी! विलीन होने से पहले क्यों खारा हो जाता है मीठा पानी?

भारत में नदियों को जीवनदायिनी माना जाता है, जो अंततः किसी सागर में जाकर मिल जाती हैं, लेकिन राजस्थान की मरुभूमि में एक ऐसी नदी बहती है जिसका अंत किसी समुद्र में नहीं, बल्कि रेगिस्तान के रेतीले धोरों और दलदल में होता है, हम बात कर रहे हैं लूनी नदी की, जिसे 'मरुगंगा' और 'लवणवती' जैसे नामों से भी जाना जाता है

Published On:
राजस्थान से निकलकर गुजरात में गायब हो जाती है यह नदी! विलीन होने से पहले क्यों खारा हो जाता है मीठा पानी?
राजस्थान से निकलकर गुजरात में गायब हो जाती है यह नदी! विलीन होने से पहले क्यों खारा हो जाता है मीठा पानी?

भारत में नदियों को जीवनदायिनी माना जाता है, जो अंततः किसी सागर में जाकर मिल जाती हैं, लेकिन राजस्थान की मरुभूमि में एक ऐसी नदी बहती है जिसका अंत किसी समुद्र में नहीं, बल्कि रेगिस्तान के रेतीले धोरों और दलदल में होता है, हम बात कर रहे हैं लूनी नदी की, जिसे ‘मरुगंगा’ और ‘लवणवती’ जैसे नामों से भी जाना जाता है। 

100 किलोमीटर तक मीठा, फिर अचानक खारा 

लूनी नदी की सबसे बड़ी विशेषता इसका स्वाद बदलने वाला पानी है। अजमेर की नाग पहाड़ियों से निकलने वाली यह नदी शुरुआती 100 किलोमीटर (बालोतरा तक) बिल्कुल मीठा और पीने योग्य पानी लेकर चलती है। लेकिन जैसे ही यह बाड़मेर के बालोतरा शहर में प्रवेश करती है, इसका पानी अचानक इतना खारा हो जाता है कि वह न तो पीने लायक रहता है और न ही खेती के लिए। 

क्यों बदल जाता है पानी का मिजाज?

वैज्ञानिकों और भूगर्भ शास्त्रियों के अनुसार, पानी के खारा होने के दो मुख्य कारण हैं:

  • लवणीय मिट्टी: बालोतरा के आगे की मिट्टी में सोडियम क्लोराइड (नमक) की प्रचुरता है। जब नदी इस रेतीली और नमकीन मिट्टी के ऊपर से गुजरती है, तो नमक के कण पानी में घुल जाते हैं।
  • प्राचीन अवशेष: माना जाता है कि यह पूरा क्षेत्र कभी टेथिस सागर का हिस्सा था। मिट्टी की गहरी परतों में दबे समुद्री लवण आज भी नदी के जल को खारा बना देते हैं।
  • प्रदूषण की मार: हाल के वर्षों में बालोतरा और पाली के कपड़ा उद्योगों से निकलने वाले केमिकल ने भी इस समस्या को गंभीर बना दिया है। 

सागर से नहीं होता मिलन 

लूनी नदी की कुल लंबाई लगभग 495 किलोमीटर है, जिसमें से अधिकांश हिस्सा राजस्थान में बहता है। राजस्थान के सात जिलों (अजमेर, नागौर, ब्यावर, जोधपुर, बालोतरा, बाड़मेर और जालौर) से होते हुए यह गुजरात के कच्छ के रण में प्रवेश करती है। यहाँ किसी महासागर में गिरने के बजाय, यह दलदली इलाके में जाकर विलीन हो जाती है। इसी कारण इसे ‘अंतः सलिला’ (जमीन के भीतर लुप्त होने वाली) भी कहा जाता है। 

खास बातें

  • उद्गम: अजमेर की नाग पहाड़ियाँ (सरस्वती और सागरमती धाराओं का मिलन)।
  • उपनाम: मारवाड़ की गंगा, लवणावरी, मरु आशा।
  • अंत: गुजरात का कच्छ का रण (दलदली क्षेत्र)। 

क्या आप इस नदी के किनारे स्थित ऐतिहासिक किलों या पर्यटन स्थलों के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त करना चाहेंगे?

Originating in Rajasthan Luni River Vanishes Into Gujarat

Leave a Comment

अन्य संबंधित खबरें